१. नटखट चंचल शर्मीली……………………. ||गीत ||– “मनोज कुमार”

नटखट चंचल शर्मीली सी ,
मूरत सी सुन्दर प्यारी सी |
मम्मी की पापा की भोली सी ,
छोटी है गुडिया कोमल सी ||

नटखट चंचल शर्मीली सी ……………

महके आँगन उससे अपना ,
वो है धन दौलत घर की |
सुक्षूषा भावना रखने वाली ,
ऐसी आली वो है तरुणी ||

नटखट चंचल शर्मीली सी ……………

सुहानुभूति वो रखती सबमें ,
चिर अमूल्य गुडिया सी |
पावस की तरहा प्रेम बरसाती ,
पंख फैलाये उड़े अम्बर में ||

नटखट चंचल शर्मीली सी ……………

खेद दिखाने वाली सुदृत मितभाषी ,
करे लगन से काम सभी न्यारी सी |
विचित्र प्रतिभा है वो तो सदाचारी ,
सहचर है मम्मी पापा की अनुरागी ||

नटखट चंचल शर्मीली सी ……………

आकाशगामिनी है न्यारी प्यारी सी ,
सबको है वो बड़ी अजीज रानी सी |
है अश्फ़ाक मेरे जीने की अस्ली जी ,
है आकिबत जीवन के असफ़ार की ||

“मनोज कुमार”

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/03/2016
    • MANOJ KUMAR MANOJ KUMAR 30/03/2016
  2. vinod yadav 19/05/2016

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