नाच और डान्स (हास्य)

आज हो रहा सब उल्टा पुल्टा
मर्द के वेश मे औरत चलेः
केश बाधे,कान मे वाली पहने
मर्द मिलते है गलेः
नाच रहे सब ताल-बेताल;
नाच जहॉ मानो स्वर्ग वहॉ
नाच बना पैसा कमाने का चान्स
तभी तो जहॉ देखो केवल डान्स ही डान्स
वचपन मे किसी किताब मे था एक दोहा
देखो,देखो मदारी आया,साथ बन्दर लाया
फिर कहा नाच मेरे बन्दर पैसा मिलेगा-
हुमने सोचा- क्यो कमाये पैसा ये बन्दर
जब इसके सारे गूण है हमारे अन्दर;
फिर क्या? सर नीचे,पैर उपर,
गर्दन लट्काये,कमर लच्काये,
करने लगे डान्स,सबने कहा शाबाश!
बहुत खूब! डान्स,डान्स,डान्स!!
देखकर,भागा बन्दर और जाना
कि हम भी थे कभी बन्दर!!

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/03/2016
  2. योगेश कुमार 'पवित्रम' योगेश कुमार 'पवित्रम' 28/03/2016

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