होली: प्रेम सूत्र

होली

रंगो का त्योहार ही नहीं

एक डोर है

प्रेम की डोर
जो बांधे रखती है

सभी को
लोग देते हैं
आहुति
होलिका दहन में
कटु भावों की
टूट जाती हैं
दीवारें
रंगो की चमक से
नफरत की
मिट जाते हैं
सारे
गिले शिकवे
छा जाती हैं
चारों तरफ
रंग बिरंगी खुशियाँ
चेहरे पर
प्यारी मुस्कान के साथ
और बंध जाते हैं
सभी
प्रेम सूत्र में

-योगेश कुमार ‘पवित्रम’

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/03/2016
    • योगेश कुमार 'पवित्रम' योगेश कुमार 'पवित्रम' 28/03/2016

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