स्नेह

स्नेह के सच्चे बंधन को
भला कोई कैसे पहचाने,
किस पर करे भरोसा
भला कोई कैसे जाने ।

सूखते फसल की प्यास देख,
फटती भू की दरार देख,
झरनों को होता मौन देख,
नदियों को खोता चैन देख,
जब नभ बूंदें बरसाता है,
घनघोर घटाऐं लाता है,
हर तृष्णा को बुझाता है,
तृप्ति का रस चखाता है,
तब शीतल हवायें मुस्कातीं हैं,
स्नेह बंधन को दर्शातीं हैं ।
धरा पसीज – पसीज सी जाती है,
अम्बर का स्नेह जो पाती है ।।

एक पल था
जब धरा घबराई थी,
फटती दरारें उसे रूलाई थी।
खोती हुई हरियाली को देख,
मुर्झाती फूलों की क्यारी को देख,
सूखते हुए कंठो को देख,
सूने होते दृगों को देख,
उसका दिल टूटा था ।।
देख कर अम्बर की बेरूखी,
उसका मन रूठा था ।

पर विश्वास के दिये ने
सूने दृगों को रोशनी दी,
मेघो ने गरज-गरज कर स्नेहों की वर्षा की ।।

सच-

स्नेह वही जो मन को सीचें,
स्नेह वही जो तन को सीचें,
स्नेह वही जो मरते को प्रान दे,
स्नेह वही जो टूटते को चैन दे।
भूखे को जो अन्न दे,
प्यासे को जो नीर दे,
अँधेरे को जो रोशनी दे,
खामोशी को जो आवाज दे,
स्नेह वही है ।
स्नेह वही है ।।

देखा सब ने,
जाना सब ने,
जो बंधन पवित्र,
जो बंधन अटूट,
वो सुख में साथ,
न दुख में दूर।
न दुख में दूर।।

अलका

10 Comments

  1. omendra.shukla omendra.shukla 28/03/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 28/03/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/03/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 28/03/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/03/2016
  4. ALKA प्रियंका 'अलका' 28/03/2016
  5. योगेश कुमार 'पवित्रम' योगेश कुमार 'पवित्रम' 28/03/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 28/03/2016
  6. राहुल कुमार 30/03/2016
    • ALKA प्रियंका 'अलका' 30/03/2016

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