ग़ज़ल।वही मेरी कहानी है ।

ग़ज़ल।वही तेरी कहानी है ।

किया गर दोस्ती हूँ तो यकीं मानो निभानी है ।
महफ़िल में रवां होकर मुझे मंजिल बनानी है ।

कहूँ मैं अज़नबी कैसे अगर तुम साथ मेरे हो ।
वही तेरी कहानी है वही मेरी कहानी है ।

जरा मैं दूर हूँ तो क्या मेरी साँसों से आ पूंछो ।
दिलो में दर्द है ठहरा छुपा आँखों में पानी है ।

न सोचों छोड़ महफ़िल को चले हम दूर जायेंगे ।
हमे भी दोस्ती की अब कोई क़ीमत चुकानी है ।

मेरे ख़ामोस रहने की कोई मजबूरियां होगी ।
मग़र हरहाल इस दिल की तुम्हे आहें सुनानी है।

महज़ दो चार दिन तक ही खुदी को रोक पाऊँगा ।
कहा न एक मानेगी बड़ी बेबस जवानी है।।

तरस आँखे भी जाती है तेरे दीदार को “रकमिश”
कहूँ क्या दर्द ही होगा वही यांदें पुरानी है ।

© रकमिश सुल्तानपुरी

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 27/03/2016
  2. RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 27/03/2016

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