गीत।मैंने मन को मार लिया है

गीत।मैंने मन को मार लिया है । ।

आ ही जाती याद तुम्हारी
चाहे जितना मै भुलवाऊ ।।
मैंने मन को मार लिया हैं
पर दिल को कैसे समझाऊ ।।1।।

इन पलको पर चलती रहती
हैं तेरी तस्वीरें
बन जाता है रूप सलोना
तेरा धीरे धीरे
इक दो दिन की बात नही है
हर दिन मैं कैसे बहलाऊ ।।
मैंने मन को मार लिया हैं
पर दिल को कैसे समझाऊ ।।2।।

न जाने क्यों जब से मैंने
देखा हैं मुस्काना
तब से सिर्फ तुम्हारा दिल में
लगा है आना जाना
तुम्हें देखने की चाहत है
पर तुमको कैसे बुलवाऊ ।।
मैंने मन को मार लिया हैं
पर दिल को कैसे समझाऊ ।।3।।

जान रहा हूं कभी नही हम
आ पायेंगे पास
कितना भी तुम कोशिश कर लो
कर लूँ मै प्रयास
फिर क्यों धड़कन बढ़ जाती है
पास तुम्हारे जब नियराऊ ।।
मैंने मन को मार लिया हैं
पर दिल को कैसे समझाऊ ।।4।।

तुमको क्या तुम निकल गये हो
इस हॄदय पर करके घाव
दर्द मुझे होता रहता हैं
तुमको क्यों होगा पछताव
बिना कहें ही अपने मन से
मै तुमसे कैसे बतलाऊ ।।
मैंने मन को मार लिया हैं
पर दिल को कैसे समझाऊँ ।।5।।

©-Ram Kesh Mishra

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