धर्म का धर्मसन्कट

आज धर्म का है धर्म सन्कट
सब लगे है अपना अपना धरम बचाने
धरम जो है मानव जाति की रक्छा के लिये
उसी धरम की रक्चा मे लगे हुये हम
धरम की रकछा मे करते अधंम
कभी डरतें थे धरम से ं हम
आज हमसे ही डरने लगे धरम
न बन पाये आस्तिक न नास्तिक
धरंम क्या है जाना नही अबतक
बेल्पत्ता, गन्गाजल मे ही धरम अटक गया
या फिर कीर्तन,प्रर्थना,अजान मे ही रूक गया
यदि न हो सोच की उर्ध्व गति
धरम की होगी दूर्गती!

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/03/2016
    • pradip 27/03/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/03/2016
    • pradip 27/03/2016
  3. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 27/03/2016
  4. pradip 27/03/2016

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