मुझे ले चल

मुझे ले चल

ठंडी शीतल ऐ हवा
मुझे ले चल तु वहां
जहाँ खुली हो आबो-हवा
और हरियाली खेतों में
महका दे जो तन-मन मेरा।
मैं रहूं और वो रहे
महकती हुई फि जां रहे
धरती की गोद में लेटे हुए
भूल जाऊं दुनिया को मैं
धरती के साथ तो बस
चोली-दामन का साथ है मेरा।
ठंडी शीतल ऐ हवा
मुझे ले चल तु वहां ।
आँखों में बस हो
एक मीठी सी शरारत
जिधर देखूँ बस यही दिखे
मुझे आपकी ही सूरत
देकर मुझे आंचल की छाँव
कर जो जीवन धन्य मेरा।
ठंडी शीतल ऐ हवा
मुझे ले चल तु वहां।

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