अक्षर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

अक्षर

हम उनके इतने करीब आ गए
के वो हमें पहचाने ही नहीं …….
किताबों के सफे कुछ दूर हों
तो अक्षर साफ़ नज़र आते हैं …….

शायर : सर्वजीत सिंह
sarvajitg@gmail.com

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/03/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 23/03/2016
  2. Shiva 23/03/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/03/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 24/03/2016

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