कान्हा ना रंगयो ………..

रंगभरी पिचकारी कान्हा ना रंगयो मोहे ना रंगयो
मेरी चुनर ना रंगयो कान्हा ना रंगयो मोहे ना रंगयो

तोहे न कोई लाज लज्जा रे कान्हा
गोपियन के पीछे तू क्यू भागत है
मैया यशोदा तेरा लाडला मोहे छेडत है
मै कैसे बचाउ मेरी लाल चुनरिया
मै कैसे बचाउ मेरी लाल चुनरिया कान्हा मोहे छेडत है

मेरी चुनर ना रंगयो कान्हा ……….……….

किधर मै जाऊ अपनी लाल चुनर बचाऊ
आज कान्हा न मानत है रंग लेके भागत है
कोई तो रोकलो मै ने अभी रंग निकाले है
अब न करू मै बात इससे कभी
अब न करू मै बात इससे कभी कान्हा मोहे छेड़त है

मेरी चुनर ना रंगयो कान्हा ……….……….

हर होली यही शरारत राधा कान्हा की मूरत
जाए कहा गोपिया रंगो से सजा वृंदावन
रंग जरा खेलु मै भी काहे कान्हा रोवत है
अब ऐसे क्यू रूठा वो मुझसे
अब ऐसे क्यू रूठा वो मुझसे कान्हा क्यू न मोहे छेड़त है

मेरी चुनर ना रंगयो कान्हा ……….……….
रंगभरी पिचकारी कान्हा ना रंगयो मोहे ना रंगयो
मेरी चुनर ना रंगयो कान्हा ना रंगयो मोहे ना रंगयो
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Kanha N Rangyo

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/03/2016

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