देखो मगर प्यार से

देखो मगर प्यार से

ना शिकायत तेरे इन्कार से
ना शिकवा तेरी तकरार से
एक बार देखो मगर, देखो मगर प्यार से

एक बार तो मीठा बोल दे
भेद दिल का खोल दे
एक बार तो नज़रें मिला
एक बार तो सूरत दिखा
हाल तेरा पूछ लूंगा पायल की झन्कार से
एक बार देखो मगर, देखो मगर प्यार से

लाखों दिलों की है तू धड़कन
छोड़ भी दे अब ये लड़कपन
प्यार का इतिहास बना
चूम ले मुझे गले लगा
चीर ना मेरे दिल को नफरत की तलवार से
एक बार देखो मगर, देखो मगर प्यार से

तेरे दिल की गहराइयों तक
मोहब्बत से रुसवाइयों तक
नाम हम अपना लिख देंगे
आसमान की उंचाईओं तक
सिर्फ तेरे ईक प्यार के इज़हार से
एक बार देखो मगर, देखो मगर प्यार से

लेखक : सर्वजीत सिंह
sarvajitg@gmail.com

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/03/2016
  2. sarvajit singh sarvajit singh 24/03/2016

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