==* रुकना चाहता हु *== (गजल)

रोकले कोई अगर तो रुकना चाहता हु
दिखे खुदा अगर तो झुकना चाहता हु

ख़त्म हुए महफ़िल जमाना गुजर गया
उनकी आग़ोश में फिर उड़ना चाहता हु

बुझ गई शम्मा और अंधेरा छा गया
जले दिया अगर तो बुझना चाहता हु

गहरा चुभा है खंजर बेवफाई का दिलमें
मिले अगर रास्ता तो मुड़ना चाहता हु

तनहा नहीं “शशि” जो जी नहीं सकता
मिले साँस अगर तो उठना चाहता हु
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शशिकांत शांडिले, नागपुर
भ्र. ९९७५९९५४५०
Rukna Chahta Hu (Gajal)

4 Comments

  1. shaurya mishra shaurya mishra 22/03/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/03/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/03/2016
  4. शशिकांत शांडिले SD 23/03/2016

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