जलेगी होली रोएगें पेड़

जलेगी होली रोएगें पेड़
लोंगों की खुशियां , फिर जलें हरे -२ पेड़
फाल्गुन मास की हरियाली छायी
होली के कारण हरे पेड़ों की श्यामत आयी |

देश भर में खुशियां छायीं
जो जिन्दा पेड़ों के कारण आयीं
जवानी से पहले ही उनकी मौतें आयीं
चारों तरफ ही कत्ले आम छायी |

करोंड़ों हरे -२ पेड़ों कि शामत फिर आयी
जैसे ही होली पास -२ आयी
छोटे -२ पेड़ों के छोटे -२ बच्चे
उनकी चीखें कहॉं किसी को सुनाई आयीं |

जाने क्या -२ दोष हममें पाया
जो इस तरह से कत्ले आम करवाया
धरती पर हरियाली हमारे कारण छायी
हमारे कारण ही सब में खुशियां छायीं I

कभी धर्म के नाम पर , कभी आस्था के नाम पर
हमारी ही शामत हर वक़्त आयी
हमारी पीर ना किसी को दिख पायी
हमारी बस्ती तो हर जगह उजड़वायी |

हमारी अर्थी तो जिन्दों की लगायी
और ऊपर से उसको आग लगायी
तुमने तो देखो खूब खुशियां मनायीं
हमारी कत्ले आम तो चारों तरफ करायी |

किस -२ को तो हमने अपनी दास्ताँ सुनायी
फिर भी किसी की कुछ समझ न आयी
हमारे दर्द की पीर ना आयी
किसी ने हमारी लाज न बचायी |

Kamlesh Sanjida photo
कमलेश संजीदा

जलेगी होली रोएगें पेड़