एक फरेब : तेरी मोहब्बत

जब मैंने जाना नहीं था होती क्या है ये मोहब्बत
ऐसे समय क्यों भेट की तुमने हमें ये झूटी रिश्वत

क्यों दिखाई छाव मुझको जब था मै जीवन पथिक
मेरे दियो मै तेल कम आज है अश्रु अधिक

राह भटकाने मै किशोर की क्या नहीं कम्पित तेरा मन था
क्यों देखा उस दिवा तुमने मुझको ऐसे एकटक
जब मैंने जाना नहीं था होती क्या है ये मोहब्बत
ऐसे समय क्यों भेट की तुमने हमें ये झूटी रिश्वत

रक्त लिप्त अश्रु दिए, जब पुष्पसेज आयी थी तरसकर
सोना था जब माँ की गोद मै क्यों नसीब मै कांटो के बिस्तर

जिंदगी ये चीज क्या है, कैसा दुःख और सुख का खेल
ये भी जाना था न मैंने तूने देदी थी क़यामत
जब मैंने जाना नहीं था होती क्या है ये मोहब्बत
ऐसे समय क्यों भेट की तुमने हमें ये झूटी रिश्वत

मिल न पाया और पुष्प तुम्हे इस दुनिया के मधुबन
अपरिपक़्व कोपल के मिटाये जीवन के वो चैनो अमन

मस्त अपने नित्य भ्रम मे, दूर माया का था साया
दृश्य होती थी मुझे भारतबर्ष मे अपनी जन्नत
जब मैंने जाना नहीं था होती क्या है ये मोहब्बत
ऐसे समय क्यों भेट की तुमने हमें ये झूटी रिश्वत

खायी दिखाई क्यों मुझे जो मैंने चुनी वो राह थी
धरा पर तब तलक मुझे न किसी की परवाह थी

जिसे तुमने प्रेम का नाम दिया वो सिर्फ एक फरेब था
जाना न तुमको मैंने सखी तुम निकले हद से भी बेहद
जब मैंने जाना नहीं था होती क्या है ये मोहब्बत
ऐसे समय क्यों भेट की तुमने हमें ये झूटी रिश्वत

या तो वो निस्वार्थ ही होती , काटता न जिगर मेरा
और न आहार बनता वियोग मे जहर मेरा

आज तारा हु मगर जलता हु फिर भी,सोचकर मूल्यरहित जान मेरी
मेरे जलने से हुए, संभाले हुए वो प्यारे न्यारे तुम्हारे खत नटखट
जब मैंने जाना नहीं था होती क्या है ये मोहब्बत
ऐसे समय क्यों भेट की तुमने हमें ये झूटी रिश्वत

एक अश्रु मेरे लिए न वहा देना तुम कभी
गृहस्थ जीवन मे तुम्हे ये काम आएंगे सभी

बियोग और फरेब की क्रोधाग्नि ने की नस्ट मेरी शीतलता
जो भी बची है मुझमे दान है तुम्हारे परमेस्वर मे सब
जब मैंने जाना नहीं था होती क्या है ये मोहब्बत
ऐसे समय क्यों भेट की तुमने हमें ये झूटी रिश्वत

तुमने मुझे ठुकरा दिया तो क्या हुआ
आज भी मन मेरा जी भर के देता है दुआ

अगले जन्म की संगिनी मैं फिर भी सजोता तुम्हे
तुझको जानकर भी आशा मन मैं मेरे पूर्ण हिम्मत
जब मैंने जाना नहीं था होती क्या है ये मोहब्बत
ऐसे समय क्यों भेट की तुमने हमें ये झूटी रिश्वत

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