तुम …..

मोहब्बत के मसीहा तुम, लिए तलवार चंगेजी ;
दिलों की बात करते हो, मगर नीयत है खूँरेजी |
अदावत है अगर मुझसे , जरा मैदान में आओ ;
दीवाना सब समझता है , पुरानी चाल अंग्रेज़ी ||
तू क्याचाहे तेरी मर्ज़ी , मगर इतना बता दूँ मैं ;
मैं वादे सब निभाऊगा , नही इक बूँद हमदर्दी |
दिलों से खेलने का जो , शगूफ़ा पाल रखा है ;
अगर माहिर खिलाड़ी तुम , नही हम भी फकत फर्ज़ी ||
कभी काबिल समझना तुम मुझे , अपनी मोहब्बत का ;
निगाहें तुम झुका लेना , ज़माना हम झुका लेंगे||

6 Comments

  1. Swati naithani Swati naithani 21/03/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/03/2016
    • sushil sushil 22/03/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/03/2016
    • sushil sushil 22/03/2016

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