प्रवृति – शिशिर “मधुकर”

कुछ लोगों को सताने में मज़ा आता है
हमको रोतों को हँसाने में मज़ा आता है.
बुरे वक्त में जब अपने भी छोड़ जाते हैं
हमको तो साथ निभाने में मज़ा आता है.
आग जलने से कुछ को ख़ुशी मिलती है
हमको तो ठंडी हवा बन के मज़ा आता है
राह में जब कभी ये अँधेरे घने हो जाते हैं
हमको तो दीपक जलाने में मज़ा आता है

शिशिर “मधुकर”

6 Comments

  1. sarvajit singh sarvajit singh 20/03/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/03/2016
  3. sushil sushil 21/03/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/03/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/03/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/03/2016

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