तेरे संग… (गज़ल)

तेरे संग जीना हैं
तेरे ही संग मरना
तेरे प्यार में दरिया हैं
तेरे ही प्यार में सफ़ीना
मन करता हैं प्यार के इस दरिया में डूब जाना।

तेरे साथ हो सुबह
तेरे ही संग हो शाम
तुम मेरे हो सबकुछ
तुम प्यारी हो न्यारी सी
तेरी सूरत,चाँद का टुकड़ा
नयन तेरी मोती सी
जुल्फ़े तेरी सुब्हान अल्ला
जैसे मोरनी पंख लहराती हो।

तेरी बदन,संगमरमर सी
तेरी साँसों की ऐसी खुशबू
जैसे पुष्पो की बागों से
चलती सुगंध मस्त पवन
चाल तेरी देखकर हायो रब्बा
मैं तो घायल ही हो गया
जैसे कोई हिरनी मटक-मटक कर चलती हो।

तेरी कोयल सी मीठी बोली
मन-मोहक हो जाता हैं
तेरी और किया तारीफ़ करू
इन आसमा के चाँद-सितारों से
तुम तो हो मेरी जानम,खुबसूरत
लाखों में,हजारों में
आँखो के पलकों में बिठाया
दिल की हर धड़कन में तुम्हें ही बसाया
मेरी साँसों की खुशबू में
अब तो हैं तुम्हें समाया।

तुम ही मेरी जान
तुम ही हो अरमान
तुम हो मेरी मंज़िल
तुम हो मेरी असियाना
तेरे ही संग अब ज़िन्दगी बिताना
एक अज़ीब सी हालत हो जाती हैं
तेरे जाने के बाद
आँखे नम हो जाती हैं,दिल टूट सा जाता
इतना प्यार करू मैं तुमसे
जानें सकल-जहाँन

तेरे ही संग जीना हैं
तेरे संग मरना
तेरे प्यार में दरिया हैं
तेरे ही प्यार में सफ़ीना
मन करता हैं इस दरिया में डूब ही जाना।

~मु.जुबेर हुसैन