तेरा चुम्बन

तुम्हारे प्रेम की चादर का वो आलिंगन
सर्द रातों में सदा मुझे देती है वो तपन

चोटों पे जब भी निकली है हृदय से क्रंदन
सहारा बना है हमेशा तेरा ये बदन

तुम्हारे समर्पण की सुगंध से बना है चंदन
सुरभित करता है हर अंग तेरा ये बदन

घर आँगन हुआ रौशन जब आई तेरे रूप की किरन
भास्कर बना है मन जैसे हुआ हो सितारों का मिलन

आत्मा तेरे तप से बन गया है कुन्दन
बुद्ध बना है जीवन जबसे मिला तेरा चुम्बन

5 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/03/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2016
  3. BARGLA BARGLA 18/03/2016
  4. Saviakna Savita Verma 20/03/2016
  5. Uttam Uttam 24/03/2016

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