मुर्दे में जान

आज फिर से उनकी आवाज कानो में क्या पड़ी
बदन की हलचल से लगा मुर्दे में जान आ गयी !
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पुलकित हो उठा रोम रोम,दिल के तार बजने लगे
बंजर में गुल खिल गये सहरा में बहार आ गई !!

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डी. के. निवातियां……!!

12 Comments

  1. Ankita Anshu Ankita Anshu 26/03/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/03/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/03/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/03/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 27/03/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/03/2016
  4. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 27/03/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/03/2016
  5. RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 27/03/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/03/2016
  6. babucm babucm 11/04/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 11/04/2016

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