एक सूअर फिर से चिल्लाया

गद्दारो को ललकारती तथा नसीहत देती मेरी ताजा रचना—

रचनाकार- कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
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लहू बना है अब लावा और आँखे भी अंगार हुईं
कलमें भी अब ओज बनीं हैं जो अब तक श्रंगार हुईं

एक सूअर फिर से चिल्लाया गू को खाकर बोला है
भारत माता की ममता को संविधान से तोला है

संविधान की बातें करता बीज विषैले बोता है
वीर बाकुरो रणवीरों की छत छाया में सोता

मुसलमान कहलाता है पर कहाँ मुसल्लम है ईमान
रग में बसती है गद्दारी दिल में बसता पकिस्तान

कुत्ते ने अब भौंक भौंक कर अपनी जात दिखा ही दी
सुअर ने खादी पहन के भी अपनी औकात दिखा ही दी

माँ को माँ ना समझे वो फिर जयकारा क्या बोलेगा
बिष ही उगले आस्तीन का सर्प जभी मुँह खोलेगा

खुशबू भी कब आयी गुल की नागफ़नी की फसलों से
हमको भी उम्मीद यही थी गद्दारो की नस्लों से

भूल गया क्या दिल्ली में जब रक्त सिंह का खौला था
वो मुल्ला भी हाथ जोड़ दुर्गे की जय जय बोला था

शुक्र है तेरा जगा दिया जो सोते भारत वीरों को
अब तो धार लगाएंगे हम जंग लगी शमशीरो को

हम तो भारत माँ की जय कहने वालों के वंशज हैं
भारत माँ की गोद में खेले मातृभूमि के अंशज हैं

जिसके कानों में माता की जय के नारे चुभ जाएँ
कह दो उनसे वो अपनी मस्जिद में जाकर छुप जाएँ

भारत माँ के पूत जभी मिलकर शमशीर उठाएंगे
ओवैसी से कुत्ते मस्जिद से भी जय चिल्लाएगे

“आग” कहे ये अमन और मानवता के रखवालों से
बात बात पर भी खतरा खतरा चिल्लाने वालों से

कदमों में झुक जाएँगे हम बाबर नहीँ कलाम बनो
अशफाक और हमीदों से जैसे देशभक्त का नाम बनो

वर्ना इतना याद रहे जीना दूभर हो जाएगा
नागफ़नी की फलती फसलों में ऊसर हो जाएगा

——बोल भारत माता की जय——-

———–कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग ”

नोट- गद्दारो को सबक देने के लिए share करें
(कॉपीराइट)

2 Comments

  1. RAJ KUMAR GUPTA Raj Kumar Gupta 18/03/2016
  2. piyush saini 25/04/2016

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