होली इस साल की

———–होली इस साल की————

लगता है अब लाल-लाल ये रंगी है लाली
माता भारती के लाल लहू से गुलाल की
और लगता है पिचकारी में भरी है रक्तधार
लाल-लाल माता “भारती” के लाल की
लगता है अब होलिका सी ना जले बुराई
जलती है चिता प्रहलाद से गौपाल की
धर्म की है हार और अधर्म की है जीत फिर
किस हक़ से मनाऊँ होली इस साल की

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080