मेमनो की खाल में भेडिये

भेडियों ने मेमनों की खाल में छुपा लिया है
अब भारती माँ के लहू से सने भेष को
और भोले हिन्दुस्तानियों को आजादी के
नाम पर भड़का के सब बढ़ा रहे कलेश को
अब भर लो हुंकार भारती करे पुकार
खण्ड खण्ड होने से बचा लो अब देश को
आओ सब सैनिकों के संग में धुलेगे हम
शत्रुओं के शोणित से भारती के केश को

कवि देवेन्द्र प्रताप सिंह “आग”
9675426080

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