कविता

टेसू को फुरसत कहाँ

थका हुआ राही चला ठहरे उसके पाँव ,
टेसू को फुरसत कहाँ जो दे ठंडी छाँव l

जिसके ह्रदय अंगार है उससे क्या उम्मीद ,
रंग पीड़ा के घोलकर खुद ही लेओ उलीच l

मन के गोदना से लिखो अधरों पर एक प्यास ,
प्यार भरी गगरी भरो छलके रंग पलाश l

OOOO

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