==* तुही जिंदगी *==

तू छोड़ दे तेरी अधूरी मोहोब्बत
मै मेरी मोहोब्बत युही निभाता हु
बेवफाईको तेरे वफ़ा जानकार मै
हसकर गमको गले से लगाता हु

गुजरे जमाने जो संगतमें तेरे
लम्होंको सारे दिलमे बसाता हु
छूटी अधूरी मंजिल जो मेरी
मंजिलको मेरे मै भूल जाता हु

फ़िक्र न कर तू मेरे चाहतो की
चाहत को मेरे दिलमे दबाता हु
भुलादे यकिनन मोहोब्बतको मेरे
यादो में तेरे जिंदगी बिताता हु

नही फासले कोई दरमियाँ हमारे
फासलोंको सारे मै हि मिटाता हु
तुझे भूलना शायद हो जाये मुश्किल
तुझे ही मै अपनी जिंदगी बनाता हु

तुझे ही मै अपनी जिंदगी बनाता हु
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शशिकांत शांडिले, नागपुर
भ्र.९९७५९९५४५०
tuhi jindgituhi jindgi

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