जिक्र तेरा

मेरे अनसुलझे प्रश्नो का हल तुम हो
मेरे वादों मेरे सपनो का कल तुम हो

उम्मीदें ख्वाहिशे मिले है मुझे तुमसे
मेरे अधरों पर मुस्कान का बल तुम हो

तुमसे अलग दुनिया मे कोइ नशा नही दिखा
मेरे लड़खड़ाते कदमो का तल तुम हो

उस ओर तुम इस ओर मैं कैस दूरियाँ मिटें
हर कदम पर सफर का एहसास तुम हो

जो मेंने खुदा से फकत हर बार चाहा
मेरी उस कदर की गजल तुम हो

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/03/2016

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