माँ-बाप का ‘त्याग’

आपदोनों का ”त्याग” इक अनमोल बीज है
जिससे उपजा हमारे जीवन का मजबूत दरख़्त(वृक्ष) है….
आपकी मेहनत से बहाया खून-पसीना ही
हमारे जीवन के दरख़्त का आहार है…..!!
आपके लिए हमलोग ही आपके समस्त संसार है …..
कोशो दूर हैं आपलोग हमसे
पर आपके दिए संस्कार हमारे पास हैं….
वो संस्कार ही हमारे भविष्य का आधार है…!!
जो कमी रह गयी थी आप दोनों के बचपन में,
उन कमियों को हमें कभी न महसूस करने दिया…..
हर दुःख-दर्द को अपने दिल में छुपा कर
हमलोगो के चेहरे पर हमेशा मुस्कान बरक़रार रखा…..
आपदोनों ने जादूगर बनकर हर गम को
हमारी ज़िन्दगी से छू-मंतर किया….
इस रहस्यमयी दुनिया में जहाँ जो दिखता वो होता नहीं और जो होता वो दिखता नहीं,
यहाँ आपलोगों ने ही कैसे जीना और रहना है ये हमें बताया …..
आपदोनों हमारे बागान के माली हैं
और हमलोग उस बागान के फूल……
माफ़ करना आपलोग अगर कभी
गलती से भी हो गयी हो हमसे कोई भूल….
किस्मत से कभी कोई शिकायत नहीं हमें
क्यूंकि उसने पैदा होते ही किस्मत की लकीर हमारे माथे पर खींच दी थी
जब ख़ुदा ने हमें आपलोगों की झोली में डाला…..
और आप जैसे माँ-बाप के आशियाने में हमें पाला …..
दुआ है हमारी उस ख़ुदा से खुश और स्वस्थ रखे हमेशा आपदोनों को….
और ऐसे ही खुशियों से जगमगाते रहे हमारे इस प्यारे आशियाने को….

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 13/03/2016

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