आँसू – अरिता सर्वजीत – दिल की आवाज़

आँसूं

हम आँसूं बहाते रहे
और वो खुशियाँ खरीदते रहे
लगता है हमारे आँसू
इतने अनमोल हो गए हैं
कि हर चीज़ खरीद सकते हैं
पर अफ़सोस वो ना खरीद सके
जिसके लिए हम आँसू बहाते रहे

लेखिका : अरिता सर्वजीत
sarvajitg@gmail.com

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/03/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 12/03/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/03/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 12/03/2016
  3. omendra.shukla omendra.shukla 13/03/2016

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