कश्मीर हमारा

अपना मुल्क,अपना देश,अपनी ये जमीन है
दुश्मनो के कानो मे तू ये जबान घोल दे
मिटा गये जो वीर अपने ,बोलकर के इन्कलाब
रख ले लाज उस लहू की,इन्कलाब बोल दे

कश्मीर इस देश के सर का मुकुट है
अनेक है हम फिर भी देखो एकजुट है
तुझ सा कमीना कौन जो अपनो को मारता
करके गुलामी और की चरणो को चाटता

अपनी शान,अपना मान,अपना ये गुरूर है
छोड दे तू इसकी इच्छा,या जहान छोड दे
अपना मुल्क—————

पाला है तुझको अपने ही टुकडो पे आजतक
अपनी दया के चर्चे फैले दूर दूर तक
तू है सपोला,दुध पीके हमको डस रहा
अपनी दया है फिर भी जो तू ,अबतक बच रहा

अपनी दया, अपना धर्म,अपना ये गुमान है
माँग ले तू अब भी माफी,अपने हाथ जोड दे
अपना मुल्क———————-

जो कट गया भारत से पाक,ये भी भूल थी
जो चुभ रही है आजतक वो ऐसी शूल थी
कश्मीर सुहागनो की मांग का सिंदूर है
ममता के आँचल का ये खिलता सा नूर है

अपना नूर,अपना सुर,अपना ये ईमान है
टिक गई जो आँखे इसपे,हम वो आँखे फोड दे
अपना मुल्क——————।