* सफर *

एक स्थान से चलना
दूसरे स्थान पर जाना
बीच में रुकना
फिर अंतिम पड़ाव पर पहुचना
सफर इसी का नाम है।

किसी का सफर होता आसान
किसी का होता मुश्किल
वह लक्ष्य तक पहुंचेगा या नहीं
डर से कई सफर करना चाहते ही नहीं।

सफर तो सभी को करना ही होगा
कर्म से इसे भरना ही होगा
कोई इसे मजे में काटे
कोई समझे इसे काटे सजा।

जीवन भी है एक सफर
सभी का अपना सोच-समझ
कोई इसे करता है पूरा
कोई छोड़ देता अधूरा।

सफर तो है सफर
सभी का अपना-अपना डगर
पहुँच जाओ अपनी मंजिल पर
कहता है अन्तः मन।

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