* वो *

खड़ा-खड़ी वह बात करता
नहीं सुनती किसी का बकवास
कर्म में वह रखता विश्वास
नहीं करता चिकनी-चुपड़ी बात
कहते हैं वह बड़ा वो…. है।

वह अपने कर्म में लीन रहे
किसी का न करे तरीफदारी
सभी चाहते उस से खातिरदारी
खुद चलाए अपने जीवन का गाड़ी
कहते हैं वह बड़ा वो…. है।

जीवन में साफ और स्वच्छ रहना चाहे
किसी का एक आना न रखना न छोड़ना चाहे
लोग उसका बात बनाए
मौका मिलते ही मजाक उड़ाए
कहते हैं वह बड़ा वो…. है।

जीवन अपने ढंग से जीता
सुख-सुबिधा के पाछे न भागे
न वह अनावश्यक खाता न पिता
दिखावे में वह विश्वास न रखे
कहते हैं वह बड़ा वो…. है।

स्वदेशी पर जोड़ लगाए
अपनी आवश्यकता न बढ़ाए
मित्य-व्ययी वह बना रहे
उचित समय पर खड़ा रहे
कहते हैं वह बड़ा वो…. है।

मेरा मानना , वह है सही
लोग कुछ भी कहें
उसके अन्दर अपने लिए ,
देश के लिए, समाज के लिए,
वो …. तो हैं हीं।

Leave a Reply