तेरा साथ – शिशिर “मधुकर”

दूर रह कर भी तेरा साथ हम निभाएंगे
जुबाँ से कुछ ना कहेंगे पर तुझे सराहेंगे.

धूप जीवन की अगर तेरा बदन जलाएगी
प्रेम का मेघ बन के हम तो बरस जाएंगे.

मेरे सायों के तले जो सदा महफूज़ हुए
नाम ले ले कर मेरा वो भी तुझे सताएंगे .

कोई चिंता न करेगा तेरे ख्वाबों की यहाँ
लोग बस अपनी कहानियाँ हमें सुनाएंगे.

कितना भी साथ में चलते रहो मीलों तक
दो किनारे कभी आपस में ना मिल पाएंगे.

न बुलाया न भुलाया न शिकवा ही किया
अपनी आदत हम अब भी न बदल पाएंगे.

खुली आँखों से हमको तुम अब ना देखोगे
बंद पलकों के सपनो में तो हम ही आएँगे.

शिशिर “मधुकर”

7 Comments

  1. sarvajit singh sarvajit singh 18/03/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2016
  2. Imran malik 18/03/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/03/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/03/2016
  4. ahsan Quresi 20/03/2016

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