* मानते हैं *

क्या आप जानते हैं
इस बात को मानते हैं
लोग अपनी सभ्यता
संस्कृति भूल
पश्चमी संस्कृति को
अपना रहे ,
अपना आन-बान शान छोड़
उसके धूल(तलवा) को चाट रहें ,
यहाँ तो जन्मों-जन्मों
का साथ होता है
वहाँ तो एक जन्म भी
नहीं निभा रहे ,
समानता का नारा दे
द्ववेश बैमनस् फैला रहे ,
हमारी संस्कृति है
कर्म-धर्म प्रधान ,
इसे अधिकार प्रधान बना रहे ,
हमारी संस्कृति है आदर्शवादी
इसे भौतिकवादी बना रहे ,
युवकों को चमक-दमक
सुख-सुबिधा की माला पहिरा
अपने धर्म से भटका रहे ,
हमारी संसाधन का पेटेटेंट करा रहे
हमही को वरगला रहे
अपने अनुसार नियम-कानून बना रहे ,
हम समझते नहीं अपने
अतीत और इतिहास को
क्या आप जानते हैं
इस बात को मानते हैं।

Leave a Reply