संसद में भाषण (०३ मार्च २०१६)

मंत्री जी ने कशीदे क्या कैसे कि,
लोग खुश हो गये
और बड़े -२ बोलों पर भी,
वहाँ जयकारे लग गये |

किसने क्या जवाब दिए ,
बस उसमें उलझ कर रह गये
टीo वीo. चैनलों पर भी,
बहस के मुद्दे मिल गये |

अरबों रूपये खर्च कर,
संसद चला कर रह गये
बस अच्छे भाषणों को,
लोग ताली देकर रह गये |

पर क्या मकसद है ये संसद,
बस चुटकी लेकर रह गये
छोटी बड़ी समस्याओं के ,
हल धरे के धरे रह गये |

उलझ गये बस इसी में,
कौन क्या यहाँ कह गये
अच्छे भाषणों की जगह ,
संसद को बनाकर रह गये |

अपना अहम बचाने को ,
दूसरों को बुरा भला कह गये
और जवाब देने में ही,
सब कीमती वक़्त बर्बाद कर गये |

देश में अधकचरी योजनाओं को,
वो तो अंजाम दे गये
और आनन- फानन में ,
उनको लागू कर गये |

जनता का भला हो न हो,
मंत्री जी तो बन गये
साथ में कुछ चमचों के भी,
वारे- न्यारे हो गये |

गरीबों की गरीबी,
और वो तो बढ़ा गये
देशो उद्धार के नाम पर,
बस बड़े -२ भाषण दे गये |

Kamlesh Sanjida photo
कमलेश संजीदा , गाजियाबाद
संसद में भाषण

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/03/2016

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