फिर हुलस के बसंत आया !!

फिर हुलस के बसंत आया !!

डाली डाली फूल खिल रहे ,
पत्ता पत्ता नया हो गया ,
सूखी दूब भी हरी हो रही ,
देख देख कर मन हर्षाया !
फिर हुलस के बसंत आया !!

देखो ऋतुराज की सेना निकली ,
खेत , वन ,उपवन ,गली ,गली ,
भवरों का गुंजन ,चिड़ियों का कूजन,
कोयलिया ने शोर मचाया !,
फिर हुलस के बसंत आया !!

आम के वृक्ष बौर से सज रहे ,
पलाश के पेड़ पर टेसू सज रहे ,
धूप सुनहरी ,दिन चमकीले ,
सरसों ने पीला परचम लहराया !
फिर हुलस के बसंत आया !!

सुरभित ,फागुनी ,बयार बौराई ,
आशा की कली ,हर दिल मुस्काई ,
राधा मतवाली का मन मोहने ,
मनमोहना ने जाल बिछाया !
फिर हुलस के बसंत आया !!

दीपिका शर्मा

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/03/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/03/2016

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