ईश्वर को पहिचानो

दिल की फ़रियाद में मिलता
मन की आवाज में मिलता
अपने अंदर को पहिचानो
वो तो हरेक के ज्ञान में मिलता |

उसको न जाने कोई
जो जाने भी उसे कैसे मिलता
न कोई पहिचाने, फिर भी न मिलता
और मिलकर भी उससे न मिलता |

हर दम मिलता रूप बदल कर
न जाने कोई वो किस भेष में मिलता
हर एक वो इंसान में मिलता
माता पिता के चरणों में मिलता |

देखो तो हर चीज में दिखता
नभ में और पाताल में दिखता
आँखों के भ्रम जाल में मिलता
अदृश्य होकर हर रोज वो मिलता |

कण- कण के छण -छण में मिलता
जाने किन- किन रूप में मिलता
अमीर गरीब के हर रूप में मिलता
बच्चों की हर मासूमियत में मिलता |

तुझमें मिलता मुझमें मिलता
दुनियां के हर तृण – तृण में मिलता
यहाँ से वहाँ हर चीज में मिलता
पूछो तो वो कहाँ -कहाँ नहीं मिलता I

Kamlesh Sanjida photo
कमलेश संजीदा , गाजियाबाद

Leave a Reply