सपनों की गुडिया

अम्मा देखी मैंने गुडिया
वो है अजब न्यारी गुडिया
अम्मा ले दो मुझको गुडिया
चार रूपये में आये गुडिया |

झट से पैसा दे-दे मुझको
मैं ले लूंगी उसको
उसके संग में खेलूंगी
कभी झूठ न बोलूंगी |

बस मुझको ले दो अम्मा
वह प्यारी सी गुडिया
बाल सुनहरे जिसके अम्मा
वो है प्यारी मेरी गुडिया |

मेरी बेटी तूं संग चल
उस गुडिया को ले – ले चल
उस गुडिया में जान छिपी है
तूं तो उसके पीछे पड़ी है |

अम्मा उसके संग मैं खेलूंगी
मीठे सपने में खो जाऊँगी
चन्द्र लोक की यात्रा करके
उसको खूब हसाऊँगी |

परियों के देश में जाकर
अपने सपनों को, मैं पंख लगाकर
संग में मेरी गुडिया होगी
और खूब गीत सुनाऊँगी |

Kamlesh Sanjida photo
कमलेश संजीदा , गाजियाबाद

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