वीर जवान

पवन वेग से चलें वीर जब
नभ सागर भी लहराता
कदम पड़ें जहाँ पर उनके
दुश्मन देख कर घबराता |

ऊँचे-ऊँचे पर्वत लांगे
उन पर अपना परचम लहराता
आसमान में जब फहरा तिरंगा
अभिमान देश का दिखलाता |

ले कर तिरंगा निकल पड़ा जब
धरती अम्बर भी थर्राता
जिस राह से गुजरे भारत वीर
हर कोई सामने आने से कतराता |

जोश भरा है होश भरा है
तिरंगे के संग उसमें वो रोष भरा है
दुनियां के हर एक कोनें में
भारत का एक वीर खड़ा है |

दुनियां को नया आयाम दिलाता
विश्व गुरु भारत कहलाता
नए-नए अविष्कारों के जरिये
दुनियां में अपना नाम फैलता |

वो है प्रहरी रात दिन का
आग उगलते मरुस्थल का
और बर्फीले तूफानों का
और भारत के सम्मानों का |

विजय तिलक माथे पर उसके
तूफानों से भी टकराता
एक अकेला ही लाख-लाख से लड़ता
कभी न वो घबराता |

Kamlesh Sanjida photo
कमलेश संजीदा , गाजियाबाद