उड़ती हुई चिड़िया

एक उड़ती हुई चिड़या के दिल में कोई एहसास नहीं .
मन के लालसाएं हुए भाव नहीं .
ईष्र्या के द्वंद नहीं.
खवाबो कि ताबीर नहीं .
हक़ीक़तों के एहसास भरे लम्हात नहीं
गर्दिश भरे पल नहीं .
अंजुमन के तारे चुनने का मलाल नहीं
मोतियों कि माला पहनने का दुःख नहीं
पद पाने कि लालसा नहीं
हुकूमत करने का भाव नहीं
मन में किसी के प्रति तपिश नहीं
और तो और उड़ती हुई चिड़िया का कोई ठौर ठिकाना नहीं .
क्या हम उड़ती हुई चिड़िया से कुछ भी सिख पाए.

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/03/2016

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