* आया बसंत *

देखो-देखो आया बसंत,
प्रेम उल्लास लाया बसंत।
अन्नपूर्णा इठला रही,
खेत-खलिहान में लहलहा रही ।।
सरस्वती भी आई हैं,
ज्ञान गंगा बरसाई है ।
काम देव नाच रहा,
प्रेम बाण चला रहा ।।
काम वासना से जगत को ,
मोह जाल में बांध रहा।
सरस्वती अपने ज्ञान से,
इसे मुक्ति मय बना रही ।।
अपने सरस पर ,
मंद-मंद मुस्का रही।
देखो-देखो आया बसंत
प्रेम उल्लास लाया बसंत ।।

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/03/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/03/2016
  3. नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 05/03/2016

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