चँदा माँमा

दूर गगन में बैठा चँदा
कितना खुश होता है
देखे हमको प्यार से इतना
पल- पल रूप बदलता है |

कितना सुन्दर कितना निर्मल
स्वच्छ चाँदनी है तेरी
तन-मन को सब गीला करती
गर्मीं को वो दूर भगाती |

दूध जैसा तू चमके
सबको भी चमकाए सदा
तेरी सुन्दर छठा के कारण
ताज महल आबाद सदा |

पल में तेरी छठा न्यारी
पल में रूप बदलता तेरा
पल-पल का खेल है तेरा
पल में यहाँ है पल में वहाँ |

चारों तरफ हैं तारे तेरे
तेरी सुन्दर छटा बढ़ाते
मोती जैसे चमके वो
जैसे किसी थाल में पड़े हों वो |

आसमान में चलता जाये
दूर हमसे वो हटता जाये
हर स्थान बदलता जाये
पृथ्वी की परिक्रमा करता जाये |

Kamlesh Sanjida photo
कमलेश संजीदा , गाजियाबाद