काला कौआ

एक डाल पर बैठा कौआ
सोच रहा था दिन भर की
आज कहाँ पर जाना मुझको
भोजन की खोज में |

जाता हूँ मैं एक नगर में
वहाँ है आज कोयल की शादी
गा कर सुन्दर गीत सुनाऊ
फूटी किस्मत आज जगाऊ |

अपनी प्रसंशा करवाने को
वह जी जान से जुट गया
गाना चाहता सुन्दर गीत
अपनी कडवी बोली से |

गया वहाँ पर सज धज कर वह
सुन्दर गीत सुनाने को
वहाँ जाकर देखा जब उसने
लाखों की थी भीड़ वहाँ पर |

अपना गाना शुरूं किया जब
देखा उन सब लोगों को
कडवी बोली को छोड़कर
मधुर गीत सुनाया उसने |

चारों तरफ थीं ताली बजतीं
सब सोचकर हैरान हुए
कौए को क्या बात सुहाई
अपना कलंक मिटाने को |

Kamlesh Sanjida photo
कमलेश संजीदा , गाजियाबाद

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