* औरत *

औरत तू क्यों घबराए।

तूने तो यह सृष्टि बनाई
तूने घर बसाई परिवार बसाया
तूने यह संसार बसाई
तुझ में यह जगत समाया।

औरत तू क्यों घबराए।

तू है माया तू है महामाया
तू ही शक्ति तू ही ज्ञान
तू दिवा है
तेरे में सारे प्रकाश विराजमान।

औरत तू क्यों घबराए।

तू इस सृष्टि का श्रृंगार
तेरा श्रृंगार शर्म हाय
दया प्रेम सहनशीलता
तेरे नस-नस में समाया।

औरत तू क्यों घबराए।

हर निर्माण एवं विनाश मव तेरा हाथ
तू ही करे सभी का विस्तार
तेरे बिन कुछ नहीं
तू क्यों हो लाचार।

औरत तू क्यों घबराए।

तू है सर्वपरी
बारम्बारता के लिए क्यों है खड़ी
औरत है तू औरत बन जा
अपनी शक्ति पहचान जा।