मंकी और डंकी

मंकी और डंकी
…आनन्द विश्वास

डंकी के ऊपर चढ़ बैठा,
जम्प लगाकर मंकी, लाल।
ढेंचूँ – ढेंचूँ करता डंकी,
उसका हाल हुआ बेहाल।

पूँछ पकड़ता कभी खींचता,
कभी पकड़कर खींचे कान।
कैसी अज़ब मुसीबत आई,
डंकी हुआ बहुत हैरान।

बड़े जोर से डंकी बोला,
ढेंचूँ – ढेंचूँ , ढेंचूँ – ढेंचूँ।
खों – खों करके मंकी पूछे,
किसको खेंचूँ, कितना खेंचूँ।

डंकी जी ने सोची युक्ति,
लोट लगाकर जड़ी दुलत्ती,
खीं-खीं करता मंकी भागा,
टूट गई उसकी बत्तीसी।
…आनन्द विश्वास
http://anandvishvas.blogspot.in/2016/03/blog-post.html

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/03/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/03/2016

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