उसका हक

मेर जिन्दगी मुक्कमल तेरी बा-हक जायेगी
मेरा तिनका-तिनका बिखेर फिर महक आयेगी

मेरी जिद से तो हवायें भी वाकिफ है यहाँ
ये आस तब थकेगी जब साँस रूक जायेगी

मै लौता आशिक नही हूँ इस महफिल मे
मैं जो रोया तो हर आँख भर आयेगी

इस गुलशन के पंछीयों मे वो वात कहाँ वची
वो एक फूल फिर आये तो वादी चहक जायेगी

5 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/03/2016
    • Nirdesh 03/03/2016
  2. Chandan 03/03/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/03/2016
  4. Ritika 05/03/2016

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