बीवी ओ बीवी

बीवी की क्या बात करूँ यारों – कभी शोख अदा से मुस्कुराती है
तो कभी मइके चली जाऊँगी कहके धमकाती है
कभी गुस्से से चिल्लाती है
तो कभी आंसूओं से दिल पिघलाती है

इसके आंसूओं में भी इक गहरा राज़ है
अपनी बात मनवाने का एक खूबसूरत अंदाज़ है
जब ये हर बात पे टोकती है तो सब सामान्य लगता है
जब ये चुप हो जाती है तो समझो भूचाल का आगाज़ है

में तो भई हमेशां इसे खुश रखने की कोशिश करता हूँ
ऊपर से खूब रौब जमाता हूँ पर अन्दर से बहुत डरता हूँ
ये तो बिजली है, ये तो कभी भी कोंध सकती है
मेरी क्या हस्ती है, ये तो किसी को भी रोंध सकती है

ये घर की चलती फिरती रौनक, हर सुख दुःख की सहभागी है
चाहे कोई भी मुसीबत हो, बस ये ही तो इक सच्ची साथी है
कैसी भी गलती हो जाए इसकी आँखों में रहता है प्यार
इसलिए यारों हमेशां करता हूँ मैं इसका आदर सत्कार

मेरा ये मशवरा है दोस्तों बीवी का ना कभी अपमान करो
इसी से हमारी हंसती – खेलती ज़िंदगी ही इसका सदा सम्मान करो
इसका सदा सम्मान करो

लेखक : सर्वजीत सिंह

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/03/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 03/03/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 03/03/2016
  3. sarvajit singh sarvajit singh 03/03/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/03/2016

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