प्लेसमेन्ट एजेंसी

प्लेसमेन्ट एजेंसी धड़ल्ले से चल रही हैं
क्यों कि बेरोजगारों की संख्या बढ़ रही हैं
तीन से छ महीने की सैलेरी एडवांस ले रहे हैं
और खूब प्लेसमेन्ट करा रहे हैं |

प्लेसमेन्ट शर्तों पर हो रहा है
किसी को परफॉरमेंस का इन्सेन्टिव दिला रहे हैं
और देश की बेरोजगारी मिटा रहे हैं
इंजिनियर डॉक्टर सबको लगवा रही हैं |

लोग ख़ुशी-ख़ुशी,
छ महीने की सैलेरी दे रहे हैं
और नौकरी पाकर,
लड्डू बाँट रहे हैं |

और हर एक दो महीने में,
नौकरी से बाहर हो रहे हैं
और परफॉरमेंस ख़राब होने का,
धब्बा लगवा रहे हैं |

लोग इसे भी कहीं नहीं,
बतला रहे हैं
और नए -नए लोगों को,
फसवा रहे हैं |

और उसमे भी कमीशन पर ,
गुजारा कर रहे हैं
और नौकरी को एक सपना समझ कर,
भूले जा रहे हैं |

प्लेसमेन्ट एजेंसी खूब चांदी काट रही हैं
सब कुछ कम्पनियों की मिली भगत से चल रही हैं
चारों तरफ कमीशन ही कमीशन चल रहा है
और नयी- नयी प्लेसमेन्ट एजेंसी खुल रहीं हैं |

लोगों की भीड़ भी,
खूब उमड़ रही है
और हर प्लेसमेन्ट एजेंसी,
१००% का दावा कर रहीं हैं |

और फिर भी हर महीने,
लाखों की वैकंसी दिखला रहीं हैं
और अपने प्लेसमेन्ट ग्राफ को
हर दिन बढ़ा रहीं हैं |

Kamlesh Sanjida photo
कमलेश संजीदा , गाजियाबाद