नैनन नीर बहाए

नैनन नीर बहाए,
मुख से कहा न जाए,
प्रीत की मारी इस बिरहन को,
इक पल चैन न आये…..

प्रीत मा तुम्हरी जग को,
बैरी बनाये,
ताने देवत अपने पराये,
किस निर्मोही संग,
नैन लड़ाये…..

इस बिरहन की,
अरज तो सुन लो,
बिसरे जग इक तुम न बिसरों,
प्रीत की हमरी लाज तो रख लो……

विष का प्याला पी जायेंगे,
हम भी मीरा बन जायेंगे,
पहन की भगवे,
हम भी जोगिन कहलायेंगे ।

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/03/2016
    • Ravi Vaid 03/03/2016
  2. Anupam Mishra 01/03/2016
    • Ravi Vaid 03/03/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/03/2016
    • Ravi Vaid 03/03/2016

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