जिन्दगी के तीन पहलू (लेजेंड ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016 )

जिन्दगी के तीन पहलू (लेजेंड ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016 )

बचपन -आइये दोस्तों मैं आपको जिन्दगी के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ |
जिन्दगी का सबसे पहला पहलु बचपन | बचपन में बच्चे अपने छोटे छोटे जूते पहनकर स्कूल जाते हैं |
वो रंग बिरंगी किताबो में खो जाता है बचपन , खिलोनो में खो जाता है बचपन |
बचपन में हम शरारत करते है कितना अच्छा होता है बचपन |
हम कितनी भी शरारत करे हमे कोई नही डाटता, माँ की ममता और पिता का दुलार होता है बचपन
वो सुहाने स्कूल के पास कुल्फी के ठेले, अगर हम गिर जाते है तो माँ का दौड़कर आना और हमे गोद में उठाना
यही होता है बचपन , माँ की गोद में वो प्यारी सी नींद कितना प्यारा होता है बचपन
नानी दादी की परियों की कहानी शायद फिर कभी सुनने को आती ही नहीं बचपन के वो राजा और रानी |
यही है जिंदगी के पहले पहलू बचपन की कहानी

दूसरा अध्याय

जवानी – जवानी में बच्चे अपनी जिन्दगी के मालिक हो जाते है उनके ऊपर शायद ही कोई अधिकार हो उनके माँ बाप का, वो माँ बाप को माँ बाप नही सोचते, वो सोचते है की हमारे घर के नौकर और नौकरानी है, अपने माँ बाप को घर से निकल देते है, ये होती है जवानी | अरे ये सोचो जिन माँ ने तुझे ठण्ड से बचाया उसी माँ को तुने कड़कती ठण्ड में बहार निकल दिया, जिस पिता ने तुझे उंगली पकड़ कर चलना सिखाया उसी पिता की तुने उंगली काट दी | जिस माँ बाप ने तेरी ख़्वाहिश पूरी की, उन्हें ही तुने ये ख़्वाहिश मांगने पर मजबूर कर दिया की अगले जन्म में हे भगवन हमें संतान नही चाहिए |
अरे जिन्होंने तुझे इतना पाल पोस के तुझे इतना बड़ा किया उन्होंने ये सोचा था की ये होगा हमारे बुढ़ापे का सहारा, उन्हें ही घर से बहार निकल दिया और उन्हें ये कहने पर मजबूर कर दिया की ये वक़्त भी आएगा तुम्हारा ये होती है जवानी
तुम्हे भी सलाह देता है हमेशा करना आदर अपने माँ बाप का क्यूंकि आगे तुम्हारा भी आने वाला है बुढ़ापा |

तीसरा अध्याय

बुढ़ापा – जिंदगी का तीसरा पहलू बुढ़ापा |
किसी ने सच ही कहा है इंसान को अपने कर्मो का फल इसी जन्म में भोगना पड़ता है ये बात सच है बुढ़ापे में वो अपने कर्मो का फल भोगते है किसी को साँस की बीमारी तो किसी को मलेरिये की तो कोई कैंसर से मरता है ये सब दुःख उसके कर्मो का फल है अगर कोई सही सलामत इस दुनिया से चला जाता है तो वो फल भी उसी के कर्मो का है मगर उनकी संतान अच्छी है तो उन्हें कोई फ़िक्र नही और अगर उनकी संतान माँ बाप से ज्यादा नशे को चाहता है माँ बाप की सेवा करने से ज्यादा वो गुंडा गर्दी करना ज्यादा पसंद करता है और अपनी बहन की रक्षा करने से ज्यादा वो ओरों की बहनो को छेड़ना पसंद करता है तो माँ बाप सोचते है की हमारी परवरिश में ऐसी कोन सी कमी रह गयी की हमे ऐसी संतान मिली , जिस उम्र में तुम्हे उनसे आशीर्वाद मिलने चाहिए उस उम्र में वो भगवन से ये मन्नत मांगते है के हे भगवन हमे अगले जन्म में ऐसी संतान नही चाहिए, आजकल के बच्चे अपनी पत्नी को सोने के आभूषण खरीद कर देते है क्या कभी उन्होंने अपनी माँ के लिए एक साड़ी भी खरीदी है अपने लिए कार अच्छी घडी एक अच्छी बाइक मगर जब पिताजी ने कहा की बेटा मेरा चश्मा टूट गया है इसे ठीक करवा दो तो बेटा कहता है क्या इस बुढ़ापे में तुम्हे बड़ा कलेक्टर बनना है? सुबह अखबारों में भविष्य देखकर मंदिरो में दान करते हैं, और घर में माँ बाप का जिन हराम करते हैं (वो बाहर चढ़ाते है जल और सोचते हैं की माँ बाप मर जाने चाहिए कल) ये बुढ़ापा दोस्तों एक कड़वा जहर है जिसे अधिकतर लोगो को पीना पड़ता हैं |
लेजेंड ऑफ़ फैन भगत सिंह 2016 – दोस्तों मैं आपको ये बताना चाहता हूँ की हमारी जिन्दगी के पहले गुरु हमारे भगवान, हमारी जिंदगी के रचियता, हमारी खुशियों में जिनके चेहरे पर मुस्कान हैं वो ही माँ बाप हमारे भगवान हैं |
माँ बाप से बड़ा कोई मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजाघर, कोई तीर्थ नही हैं अगर हम माँ बाप को पूजते हैं तो दुनिया की कोई ताकत ऐसी नही है जो हमारी कामयाबी को हमे मिलाने से रोक सके |
आइये हम परण लेते है की हम सब अपने माँ बाप की सेवा करेंगे क्यूंकि पहले वो हमारे जिंदगी को चलने वाली लकड़ी थी और अब हम उनके बुढ़ापे का सहारा बनना होगा |

लेखक :- साहिल शर्मा S /o मनोज शर्मा
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