उदार बनो

एक अकेला न रहो, संसार बनो
कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो

किसके स्वार्थ पे सब न्योछावर
पाप करा रहे पुण्य बताकर
सही गलत से किसका नाता
क्लेश द्वेष का है जन्मदाता
पाप-पुण्य के बीच का दीवार बनो
कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो

आदि धुंध है अंत भी धुंधली
किसके हाथ की तू कठपुतली
क्यों काटों का बीज है बोना
इक दिन पड़ेगा सबको रोना
परस्पर प्रेम बढ़ाने का आधार बनो
कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो

किस निर्णय में क्या स्वार्थ है
तेरी डोरी किसके हाथ है
कहाँ खो गयी विचार की शक्ति
धर्मांध हो गयी क्यों तेरी भक्ति
अर्थहीन किसी निर्णय का विचार बनो
कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो

सत्य का क्या विकल्प है
सेवा ही श्रेष्ठ संकल्प है
निश्छल प्रेम जिसे हृदय तड़पता
सेवा त्याग से ही उपजता
सत्य सेवा व त्याग प्रेम का प्रचार बनो
कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो

कवि – भोला शंकर सिंह ‘गोल्डी’

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