सिगरेट (२८ मई १९९१ )

पहले तुमने हमको है जलाया
और हमको है पिया
अब तुमको मैं जलाऊ
और तुमको है पिया |

तुम समझते हो क्या
तूने मुझको है पिया
यही तो भूल है प्यारे
मेने तुझको है पिया |

कश मारे है, जो तूने मेरे
और आनंद है, जो लिया
मेने आनंद के बदले
तुझे है पिया |

तूनें माचिस जला कर मुझे
राख बना डाला
मैंने तुझमे ही समांकर
तुझे ही खाक बना डाला |

तूने उस अंदाज मे छोड़ा मुझे
जला कर राख बना डाला
मैं तुझे उस अंदाज में छोडूंगी
की तुझे मेने खाक बना डाला |

मैं आँशू आने न देती
मैं तुझको रोने न देती
मैं भीतर ही भीतर जला देती
और मैं तुझको राख कर देती |

मैं खुद भी जलती हूँ
तुझको भी जलती हूँ
भेद इतना है प्यारे कि पहले जलती हूँ
और तुझे जीवन भर जलातीं हूँ |

मैं तुझे बिन दाग कर दूंगी
मैं तुझे खाक कर दूंगी
मैं तो राख ही बनूगी
मैं तो तुम्हें बरबाद कर दूंगी |
Kamlesh Sanjida photo
कमलेश संजीदा , गाजियाबाद

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